ग़ज़ल: गज़ब हो गया
गायक: पंकज उधास
संग्रह: तरन्नुम (Vol.1)
साल: १९८४
गीत: मुमताज़ राशिद
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी छुप गयी चाँद शरमा गया
चाँदनी छुप गयी चाँद शरमा गया
आपका मुस्कुराना ग़ज़ब हो गया
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में
दिल की धड़कन मेरी तेज़ होने लगी
रात आँखों में काँटे चूभोने लगी
दिल की धड़कन मेरी तेज़ होने लगी
रात आँखों में काँटे चूभोने लगी
वस्ल की रात में बात ही बात में
वस्ल की रात में बात ही बात में
यूँ तेरा रूठ जाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में
झूम कर काली काली घटा जब उठी
रात अपनी तो करवट बदलते कटी
झूम कर काली काली घटा जब उठी
रात अपनी तो करवट बदलते कटी
कुछ तो मौसम ने बेचैन रखा हमें
कुछ तो मौसम ने बेचैन रखा हमें
कुछ तेरा याद आना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में
अपने हिस्से में तूफ़ा की तक़दीर थी
ज़िंदगी अपनी मौज़ो की ज़ंजीर थी
अपने हिस्से में तूफ़ा की तक़दीर थी
ज़िंदगी अपनी मौज़ो की ज़ंजीर थी
डूब जाने का अपने हमें ग़म ना था
डूब जाने का अपने हमें ग़म ना था
उसका साहिल पे आना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी छुप गयी चाँद शरमा गया
चाँदनी छुप गयी चाँद शरमा गया
आपका मुस्कुराना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में चाँद के सामने
रुख़ से परदा हटाना गज़ब हो गया
चाँदनी रात में
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